जनाब लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा नहीं देखा तो क्या देखा?

दोस्तों, लखनऊ हिस्टोरिकल प्लेस होने के साथ-साथ पूरे उत्तर प्रदेश का दिल है आज हम लखनवी अंदाज़ में नवाबो के शहर की शान कहे जाने वाले बड़े इमामबाड़े की कुछ बातें आपको शार्ट में बताने वाले हैं, जिसे भूल-भुलैया भी कहते हैं, यह नवाब आसफ़उद्दौला ने बनवाया था जिसका अपने आपमें एक अलग ही वजूद है, अक्सर लोग जब लखनऊ आते हैं तो बड़ा इमामबाड़ा एक बार ज़रूर घूमने जाते हैं, क्योंकि इसे लखनऊ का शान-ए-अवध भी कहे तो यह ग़लत नही होगा ।

जनाब Lucknow Bara Imambada नहीं देखा तो क्या देखा?


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यहां के तहज़ीब याफ़्ता लोग बड़े ही अदब के साथ पेश आते है इस जगह का अदब व अंदाज़ की तारीफ़ पूरे देश मे बयाँ किया जाता है, मज़ाकिया लहज़े में कहें तो यहां की बकरी भी अदब के साथ 'में में' करती है, जैसा कि आप जानते हैं लखनऊ शहर उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी पिछले दस सालों में काफी एडवांस सिटी हो चुकी है, अब तो मेट्रो भी दौड़ लगाने लगी है साथ मशहूर इमामबाड़ा एक आइकॉन के रूप में गर्व से जुड़ा हुआ है ।

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कहते हैं किसी भी जगह की खूबसूरती में उस वक़्त चार चाँद तब लगता है, जब उस जगह किसी समंदर झील या फिर नदी हो, जी हां ऐसी भी एक नदी यहॉँ मौजूद है जोकि गंगा नदी की सहायक गोमती नदी है जिसके किनारे बसा लखनऊ शहर अपने खूबसूरती और बेहतरीन इमारतों के आर्केटेक्चर के लिए जाना जाता है बड़े इमामबाड़े से यह नदी 2 KM की दूरी पर है ।

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भूलभुलैया में मौजूद शाही बाउली इमामबाड़ा भी है जो सीढ़ीदार कुएं की तरफ जाता है, यह नवाब ज़मानें की धरोहर है, दरअसल यह उस ज़माने का शाही हमाम "नहाने की जगह" था, यह बावड़ी गोमती नदी से जुड़ी है, जिसमें पानी से ऊपर दो फ्लोर हैं, बाकि साल भर पानी के भीतर डूबा रहता हैं आपको इमाम बाड़े से जुड़े दिलक़श बात बताते है, यह बाड़ा हिस्टोरिकल होने के साथ रिलिजियस इम्पोर्टेंस भी रखता है, बता दें की मुस्लिम (शिया) कम्युनिटी के लोगों द्वारा मुहर्रम के महीने में यहां से ताजिया का जुलूस निकाला जाता है।

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नवाबों का शहर' अमा यार सही सुना अपने.! नवाबों के नाम से मशहूर लखनऊ शहर में अपने तहज़ीब और उर्दू लैंग्वेज व बेहतरीन खूबियों में अलग-अलग अट्रैक्शन से जाना जाता है "लखनऊ है जनाब चिकन खाया भी और पहना भी जाता है" लखनवी चिकन बिरयानी व चिकन का कुर्ता, कुर्ती दोनों ही दुनिया भर में मशहूर हैं क्योंकि यहां के चिकन जैसा टेस्ट कही और नही मिलता ना ही यहाँ के जैसा वर्क किसी और जगह के कुरते की कढ़ाई में नही होता ।

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बड़े इमामबाड़े के पास ही में अपरोक्स 1 KM पर हिस्टोरिकल गेट जिसे रुमी गेट कहते हैं, जिसका ज़बर्दस्त आर्किटेक्चर कहीं और देखने को नहीं मिलता, जिसे देख आज कल के मॉडर्न आर्किटेक्चर के होश ख़राब हो जाते हैं, क्योंकि की उस ज़माने में जो कारी ग़री थी उसकी बात ही अलग है, इमामबाड़े का निर्माण नवाब आसफ़उद्दौला साहब ने "1784" में कराया जोकि दो साल "1786" में बन कर तैयार हुआ था और इसके कॉन्सेप्ट डिज़ाइनर 'किफायतउल्‍ला' थे, जो ताजमहल बनाने वाले आर्केटेक के रिलेटिव कहे जाते हैं।

तो आइये जानते हैं लखनऊ में एंट्री करने के बाद आप वहां तक कैसे पहुचें।

क्या देखें..?

भूलभुलैया, आसफ़ी मस्जिद, रूमी दरवाज़ा

कैसे पहुँचें..?

फ्लाइट, ट्रेन, बस आदि से पहुँचा जा सकता है, 

एयरपोर्ट :- अमौसी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा

रेलवे स्टेशन :- चारबाग़, ऐशबाग़ रेलवे स्टेशन, लखनऊ सिटी रेलवे स्टेशन, आलमनगर रेलवे स्टेशन, बादशाहनगर रेलवे स्टेशन, चारबाग़ रेलवे स्टेशन से बड़ा इमामबाड़ा 5.3 किमी की दूरी पर स्थित है

बस :- चारबाग़ बस टर्मिनस, कैसरबाग़ बस टर्मिनस, डॉ. भीमराव अम्बेडकर बस टर्मिनस
टैक्सी, साइकिल रिक्शा, ऑटोरिक्शा

अब चॉइस आपपे डिपेंड करता हैं किसकी सवारी करना चाहेंगे ।

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लोकेशन - चौक, मच्छी भवन के पास, लखनऊ, उत्तर प्रदेश- 226003

खुलने का दिन- मंगलवार से रविवार तक

खुलने का समय- सुबह 6 बजे से, शाम 7 बजे तक, और शुक्रवार जुमा नमाज़ के बाद 3 बजे। 

भूलभूलैया खुलने का समय- यह सूूबह 9 बजे खुलता है

एंट्री फ़ीस - 50 रुपए भारतीय के लिए, 300 रुपए विदेशी के लिए

बंदी-  सोमवार 

फोटोग्राफी- फ्री

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